बवासीर का देसी इलाज: घरेलू उपाय, डाइट प्लान और आयुर्वेदिक तरीके (Bawaseer ka Desi Ilaj)

बवासीर का देसी इलाज:

सच बात करें तो बवासीर (haemorrhoids) एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में लोग घर में भी खुलकर बात नहीं करते। पेट में भारीपन, शौच के वक्त जलन, कभी-कभी खून, और ऊपर से यह डर कि कोई जान न जाए। यही शर्म इस बीमारी को और खतरनाक बना देती है। जो तकलीफ शुरुआत में एक हफ्ते में ठीक हो सकती थी, वो महीनों तक खिंच जाती है।

भारत में बवासीर के मरीज़ों की तादाद बहुत ज़्यादा है। खराब खान-पान, घंटों एक जगह बैठे रहना, कम पानी पीना, ये सब मिलकर इस बीमारी को बुलावा देते हैं। गाँव में लोग इसे "महेशी" या "अर्श" भी कहते हैं। नाम कुछ भी हो, तकलीफ एक जैसी है।

इस “बवासीर का देसी इलाज (bawaseer ka desi ilaj)” आर्टिकल में हमने वो सब लिखा है जो एक मरीज़ को सच में जानना चाहिए, कौन से घरेलू नुस्खे असल में काम करते हैं, कौन सी आयुर्वेदिक दवाइयाँ लें, खाने में क्या बदलाव करें, और सबसे ज़रूरी, कब डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी हो जाता है।

बवासीर क्या है और क्यों होती है? (Bavaseer Kaise Hota Hai)

गुदा यानी Anus के अंदर और बाहर कुछ नसें होती हैं। जब इन नसों पर बहुत ज़्यादा दबाव पड़ता है, जैसे कब्ज़ में ज़ोर लगाना, लंबे समय तक बैठे रहना, तो ये नसें फूल जाती हैं। इन्हीं फूली हुई नसों को बवासीर या पाइल्स कहते हैं।

यह दो तरह की होती है:

खूनी बवासीर: शौच के वक्त लाल खून आता है। दर्द कम होता है लेकिन अंदर की नसें प्रभावित होती हैं।

बादी बवासीर: इसमें खून नहीं आता, लेकिन मस्से बाहर निकले रहते हैं। बैठने-उठने में बहुत तकलीफ होती है, जलन और खुजली रहती हैं।

किन वजहों से होती है बवासीर:

  • पुरानी कब्ज़
  • दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना
  • खाने में फाइबर की कमी
  • पानी बहुत कम पीना
  • प्रेगनेंसी के दौरान पेट पर दबाव बढ़ना
  • मोटापा और बिल्कुल भी कसरत न करना
  • शौचालय में बहुत देर तक बैठना (और मोबाइल चलाते रहना)

बवासीर के लक्षण कैसे पहचानें? (Bawaseer Ke Lakshan)

कई बार लोग इसे साधारण कब्ज़ समझकर छोड़ देते हैं। ये लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएं:

  • टॉयलेट के बाद टिशू या पानी पर लाल खून दिखना
  • गुदा के आसपास बहुत खुजली और जलन होना
  • बैठने पर दर्द या असुविधा
  • शौच के बाद भी लगे कि पेट पूरा साफ नहीं हुआ
  • गुदा के बाहर कुछ उभरा हुआ या सूजा हुआ महसूस होना
  • शौच के लिए बहुत ज़्यादा ज़ोर लगाना

दो हफ्ते से ज़्यादा ये तकलीफ रहे तो घरेलू उपायों के साथ-साथ डॉक्टर से भी मिलना ज़रूरी है।

बवासीर का देसी इलाज (Bawaseer Ka Gharelu Ilaj)

नीचे हमने कुछ बवासीर का इलाज (bavasir ka ilaaj) के घरेलू उपाय दिए हैं जो आपको पाइल्स से घर बैठे रहत देने में मदद कर सकते हैं।

1. एलोवेरा जेल (Aloevera Gel)

घर में एलोवेरा का पौधा हो तो बहुत काम आता है। ताज़ी पत्ती तोड़ें, बीच से काटें और ठंडा जेल निकालें। इसे सीधे मस्सों पर लगाएं। जलन में फर्क जल्दी महसूस होता है। जिन्हें खूनी बवासीर है, वो सुबह खाली पेट एक छोटा गिलास एलोवेरा जूस पिएं, इससे आपका पेट भी ठीक रहेगा।

2. गुनगुने पानी की सिकाई (Sitz Bath)

यह तरीका थोड़ा पुराना लगता है लेकिन बहुत कारगर है। एक बड़े टब या बाल्टी में इतना गुनगुना पानी भरें कि आप उसमें बैठ सकें। 15-20 मिनट बैठे रहें। अगर सेंधा नमक मिला सकते हैं तो और अच्छा। दिन में दो बार करें, सुबह और रात को। बवासीर के मस्से सुखाने के उपाय में यह सबसे भरोसेमंद नुस्खा है।

3. नारियल तेल (Coconut Oil)

बाज़ार में मिलने वाला ठंडा दबाया (cold-pressed) नारियल तेल लें। रुई की मदद से रात को सोने से पहले मस्सों पर लगाएं। इसमें सूजन घटाने के गुण होते हैं और मल त्याग भी आसान होता है। लगातार एक हफ्ते लगाएं, फर्क दिखेगा।

4. अरंडी का तेल (Castor Oil)

रात को सोते वक्त एक गिलास हल्के गर्म दूध में एक छोटा चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर पिएं। सुबह पेट साफ होगा और मल नरम रहेगा। जब ज़ोर नहीं लगाना पड़ेगा तो मस्सों पर दबाव खुद कम होगा।

5. हल्दी और देसी घी (Haldi and Ghee)

दो चम्मच देसी घी में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं और मस्सों पर लगाएं। रात को लगाकर सो जाएं। हल्दी इन्फेक्शन नहीं होने देती है और घी जलन को शांत करता है। यह बवासीर की घरेलू दवा बहुत पुरानी है, दादी-नानी के ज़माने से चली आ रही है।

6. त्रिफला चूर्ण  (Triphala Powder)

यह तीन फलों,आंवला, हरड़ और बहेड़ा से बना चूर्ण है। रात को एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें। पेट सुबह बिल्कुल साफ होगा। बवासीर के घरेलू उपचार (bavasir ke gharelu upchar) में यह सबसे पुराना और परखा हुआ नुस्खा है।

7. सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)

आधे कप पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं और रुई से मस्सों पर लगाएं। खुजली और जलन जल्दी कम होती हैं। सीधे बिना पानी मिलाए मत लगाएं, ज़्यादा जलन हो सकती है।

बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज (Bawaseer Ki Ayurvedic Dawa)

अब बात करते हैं कुछ और ऐसी चीज़ों की जो आयुर्वेद में बवासीर के लिए बहुत ज़रूरी मानी जाती हैं और जो अक्सर घर में या पास की दुकान पर मिल जाती हैं!

कलौंजी (Kalonji): इसे काला जीरा भी कहते हैं। आधा चम्मच कलौंजी को थोड़ा शहद के साथ मिलाकर खाएं। इसमें थाइमोक्विनोन (Thymoquinone) नाम का तत्व होता है जो सूजन कम करता है और पाचन को दुरुस्त रखता है। बवासीर में यह अंदरूनी जलन को शांत करने में मदद करता है।

मेथी (Methi): रात को एक चम्मच मेथी दाना पानी में भिगोएं और सुबह खाली पेट खाएं। मेथी में फाइबर और म्यूसिलेज होता है जो मल को नरम बनाता है और कब्ज़ नहीं होने देता। खूनी बवासीर में मेथी का पानी पीना फायदेमंद रहता है।

हरड़ (Harad): त्रिफला का एक हिस्सा यही है। हरड़ को अकेले भी ले सकते हैं, रात को आधा चम्मच हरड़ चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें। यह आंतों की सफाई करती है, मल त्याग आसान बनाती है और बवासीर की जड़ यानी कब्ज़ को दूर रखती है।

नीम (Neem): नीम की पत्तियों को पीसकर मस्सों पर लगाने से इन्फेक्शन नहीं होता। अगर मस्सों में घाव या जलन हो तो नीम का तेल भी लगा सकते हैं। नीम एंटीबैक्टीरियल है और ये बाहरी इस्तेमाल में बहुत काम आता है।

हल्दी (Haldi): आयुर्वेद में भी हल्दी को "प्राकृतिक एंटीबायोटिक" माना जाता है। बवासीर में हल्दी वाला दूध रात को पीना और मस्सों पर हल्दी-घी का लेप लगाना बहुत असर करता है।

नीलोफर (Nilophar): यह एक कम जानी-पहचानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसे नीले कमल का फूल भी कहते हैं। यह पित्त को शांत करती है और खूनी बवासीर में खून रोकने में मदद करती है। किसी आयुर्वेदिक वैद्य से इसकी सही मात्रा लेकर काढ़े के रूप में लें।

मंजिष्ठा (Manjistha): यह खून साफ करने वाली जड़ी-बूटी है। खूनी बवासीर में जब खून बहता है तो शरीर में गर्मी बढ़ जाती है। मंजिष्ठा उस गर्मी को कम करती है और खून को शुद्ध रखती है। आधा चम्मच मंजिष्ठा पाउडर शहद के साथ लें।

सौंठ (Saunth): यह सूखी अदरक का पाउडर है। बवासीर में पाचन बहुत कमज़ोर हो जाता है। सौंठ पाचन को ठीक करती है, गैस और अफारे से राहत देती है। एक चुटकी सौंठ, एक चुटकी हींग और थोड़ा सेंधा नमक  तीनों मिलाकर पानी के साथ लें।

Note: एक बात ज़रूर ध्यान रखें, ये बवासीर के घरेलू उपाय, दवाइयाँ और जड़ी-बूटियाँ किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लें। हर किसी का शरीर अलग होता है और गलत मात्रा फायदे की जगह नुकसान कर सकती है।

बवासीर में क्या खाएं, क्या नहीं: सीधी और सरल डाइट

खाने में बदलाव किए बिना कोई भी दवा ज़्यादा काम नहीं करेगी। यह सच है।

बवासीर में खाएं ये चीज़ें:

  • दलिया, जौ की रोटी, ओट्स - फाइबर भरपूर, पेट हल्का रहेगा
  • पपीता, अमरूद, केला, नाशपाती - रोज़ एक फल खाएं
  • लौकी, तोरई, पालक, गाजर - ये सब्ज़ियाँ आंतों के लिए अच्छी हैं
  • छाछ - दोपहर के खाने के साथ एक गिलास छाछ ज़रूर लें
  • भीगे अंजीर - रात को 2-3 अंजीर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाएं, यह खूनी बवासीर के घरेलू इलाज में बहुत असरदार है
  • पानी - दिनभर में 8-10 गिलास पानी पीना ज़रूरी है, इसमें कोई समझौता नहीं

बिल्कुल न खाएं:

  • मैदा  समोसा, ब्रेड, बिस्किट, पूड़ी
  • बहुत तीखा और तला हुआ खाना
  • शराब और बीड़ी-सिगरेट
  • ज़्यादा चाय या कॉफी
  • बाहर का जंक फूड  बर्गर, पिज़्ज़ा, चिप्स

खूनी बवासीर में खून आना कैसे बंद करें?

खूनी बवासीर की दवा घरेलू उपचार में ये तरीके काफी काम आते हैं:

  1. नागकेसर + मक्खन: एक चम्मच नागकेसर पाउडर एक चम्मच ताज़े मक्खन के साथ सुबह खाली पेट लें।
  2. आम की गुठली: गुठली को छाया में सुखाएं, पीसकर पाउडर बनाएं। एक चम्मच पानी के साथ लें।

  3. ठंडे पानी की सिकाई: खून आने पर तुरंत ठंडे पानी से सिकाई करें, जल्दी आराम मिलता है।

  4. भीगी किशमिश: रात को एक मुट्ठी किशमिश पानी में भिगोएं, सुबह खाएं और वही पानी पिएं।

  5. छाछ + काला नमक + जीरा: दोपहर को रोज़ पिएं, पेट भी ठीक रहेगा, खून भी कम होगा।

डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है?

घरेलू नुस्खे हल्की बवासीर में काम करते हैं पर अगर आप नीचे दिए गए लक्षण देख रहे हैं तो आपको डॉक्टर को दिखने की जरूरत है। 

  • खून बहुत ज़्यादा आ रहा हो, रुक नहीं रहा
  • मस्से बाहर निकल आए हों और वापस अंदर न जाएं
  • बुखार के साथ तेज़ दर्द हो
  • तीन हफ्ते के घरेलू उपाय के बाद भी कोई फर्क न दिखे
  • शौच करना बहुत मुश्किल हो गया हो

आजकल लेज़र ट्रीटमेंट काफी आम हो गया है, न चीर-फाड़, न लंबा आराम। उसी दिन घर जा सकते हैं।

निष्कर्ष

बवासीर को लेकर जो सबसे बड़ी गलती लोग करते हैं वो यह है कि वो इसे या तो बहुत हल्के में लेते हैं। सच यह है कि यह न तो कोई छोटी-सी बात है जिसे नज़रअंदाज़ करते रहें, और न ही कोई ऐसी बीमारी है जिसका इलाज न हो।

जो बवासीर का देसी इलाज के नुस्खे इस आर्टिकल में बताए गए हैं, एलोवेरा, त्रिफला, सिकाई, सही खान-पान, ये सब मिलकर काम करते हैं। अकेले एक चीज़ से चमत्कार की उम्मीद मत रखें। शरीर को ठीक होने में वक्त लगता है, इसलिए धैर्य रखें।

अगर घरेलू उपाय करते हुए तीन हफ्ते हो जाएं और खास फर्क न दिखे, तो इसका मतलब है कि आपकी बवासीर थोड़ी आगे बढ़ चुकी है और उसे अब डॉक्टर की ज़रूरत है।

शर्म छोड़ें, सही कदम उठाएँ क्योंकि सेहत से बड़ी कोई दौलत नहीं होती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):

Q1. बवासीर को जड़ से खत्म करने के लिए क्या करें?

Ans: सबसे पहले कब्ज़ ठीक करें बवासीर की असली जड़ यही है। त्रिफला चूर्ण लें, पानी खूब पिएं, रोज़ थोड़ा चलें और फाइबर वाला खाना खाएं। हल्की बवासीर में इतना काफी है। ज़्यादा गंभीर हो गई हो तो लेज़र ट्रीटमेंट एक बार में खत्म कर देता है।

Q2. बवासीर को तुरंत ठीक कैसे करें?

Ans: फौरी राहत के लिए गुनगुने पानी की सिकाई सबसे तेज़ काम करती है। एलोवेरा जेल लगाएं या ठंडे पानी से सिकाई करें जलन और सूजन आधे घंटे में काफी कम हो जाती है।

Q3. बवासीर के लिए कौन सी देसी दवाइयाँ हैं?

Ans: त्रिफला चूर्ण, अभयारिष्ट, नागकेसर चूर्ण, अर्शकुठार रस और कांकायन वटी ये सब किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर मिल जाती हैं। घर पर एलोवेरा, हल्दी-घी और अरंडी तेल भी बहुत असरदार हैं।

Q4.खूनी बवासीर जड़ से खत्म कैसे करें?

Ans: नागकेसर चूर्ण, भीगे अंजीर और आम की गुठली का पाउडर रोज़ लें। खाने में मसाला कम करें। कब्ज़ बिल्कुल न होने दें। खून बहुत आए तो डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।

Q5.लिवर इन्फेक्शन में क्या नहीं खाना चाहिए?

Ans: शराब, तला हुआ खाना, पैकेटबंद चीजें और ज़्यादा मीठा बिल्कुल न खाएं। ये सब लीवर पर और ज़्यादा बोझ डालते हैं और ठीक होने में देरी करते हैं।

Q6. बवासीर के मस्सों को सुखाने के लिए सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

Ans: नारियल तेल, एलोवेरा जेल और हल्दी-घी का लेप रोज़ लगाएं। आयुर्वेद में अर्शकुठार रस मस्से सुखाने के लिए सबसे भरोसेमंद दवा मानी जाती है।

Q7.बवासीर में खून आना कैसे बंद करें?

Ans: नागकेसर-मक्खन सुबह खाली पेट लें। ठंडे पानी की सिकाई करें। आम की गुठली का चूर्ण खाएं। तीखा खाना बंद करें और पानी खूब पिएं।

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Dr. Prachi Sharma Vats – Ayurvedic Physician, Author & Wellness Expert

Dr. Prachi Sharma Vats is a dedicated Ayurvedic physician specializing in Ayurvedic nutrition, women’s hormonal health, and PCOD management. She holds a Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery (BAMS) degree from Shri Krishna AYUSH University, Kurukshetra.

Currently associated with Sheopal’s, a leading Ayurvedic and wellness brand, Dr. Prachi focuses on treating lifestyle related disorders through holistic Ayurvedic practices, personalized diet guidance, and natural healing therapies. Her approach blends classical Ayurvedic wisdom with modern health insights to promote sustainable well-being.

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